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Maa Durga Chalisa

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Maa Durga Chalisa
Last updated |September 21, 2026

श्री दुर्गा चालीसा Durga Maa Chalisa Hindi PDF and Lyrics with Meaning

Durga Chalisa PDF

Welcome All! The Durga Chalisa Hindi lyrics (दुर्गा चालीसा हिंदी) free PDF can be downloaded here.

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Read also – Maa Durga Ki Aarti In Hindi | मां दुर्गा की आरती

Maa Durga Chalisa Pdf in Hindi

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Maa Durga Chalisa Lyrics

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1.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

अर्थ: माँ को प्रणाम जो सभी को सुख देती हैं। उस अम्बे माँ को प्रणाम जो सबके दुखों का हरण कर लेती हैं।

2.
निराकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

अर्थ: हे माँ! आपकी ज्योति निराकार अर्थात सीमित न होकर असीम है। यह तीनों लोकों में चारों ओर फैली हुई है।

3.
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

अर्थ: चंद्रमा के समान चमकने वाला आपका मुख बहुत विशाल है। आपके नयन लाल और आपकी भौहें विकराल हैं।

4.
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

अर्थ: माँ आपका यह रूप बहुत अधिक सुहावना है और जो आपके दर्शन करता है, उसे परम सुख प्राप्त होता है।

5.
तुम संसार शक्ति लय कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अर्थ: इस संसार में जितनी भी शक्तियाँ हैं, वे आपके अंदर विराजमान हैं। आप संसार के पालन हेतु अन्न और धन प्रदान करती हैं।

6.
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

अर्थ: अन्नपूर्णा होकर आप पूरे जगत का पालन करती हैं। आप अत्यंत सुंदर आदि शक्ति हैं।

7.
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

अर्थ: जब प्रलय होता है तो आप सबका नाश करती हैं। आप गौरी रूप हैं और शिव जी को प्रिय हैं।

8.
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

अर्थ: योगी और शिव आपका ही गुणगान करते हैं। ब्रह्मा और विष्णु भी आपका ही ध्यान करते हैं।

9.
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा॥

अर्थ: आपने ही सरस्वती का रूप धारण किया। आप ऋषि-मुनियों को सद्बुद्धि देकर उनका उद्धार करती हैं।

10.
धरा रूप नरसिंह को अम्बा।
प्रगट भईं फाड़कर खम्बा॥

अर्थ: हे अम्बा! आपने नरसिंह रूप धारण करके खंभे को चीरते हुए प्रकट होकर धर्म की रक्षा की।

11.
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

अर्थ: आपने प्रह्लाद की रक्षा की और उसके अत्याचारी पिता का अंत किया।

12.
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

अर्थ: आपने लक्ष्मी का रूप धारण किया और श्री नारायण के साथ विराजमान हुईं।

13.
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन॥

अर्थ: आप क्षीरसागर में भी विराजमान हैं। हे दया की सागर माता, मेरे मन की इच्छा पूर्ण करें।

14.
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥

अर्थ: हिंगलाज की भवानी माँ भी आप ही हैं। आपकी महिमा अनंत है, जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।

15.
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

अर्थ: धूमावती और मातंगी माता भी आप ही हैं। आप भुवनेश्वरी और बगलामुखी रूप में सभी को सुख प्रदान करती हैं।

16.
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

अर्थ: श्री भैरव और पूरे जगत की तारिणी शक्ति भी आप ही हैं। आप छिन्नमस्ता रूप में संसार के दुखों को दूर करती हैं।

17.
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

अर्थ: हे भवानी माता, आप सिंह पर सवार होकर सुशोभित होती हैं। आपके आगे लांगुर वीर अर्थात हनुमान जी अगुवाई करते हैं।

18.
कर में खप्पर-खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजे॥

अर्थ: आपके हाथों में खड्ग और खप्पर विराजमान हैं, जिन्हें देखकर काल भी भयभीत हो जाता है।

19.
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

अर्थ: आपके पास अनेक अस्त्र और त्रिशूल सुशोभित हैं, जिन्हें देखकर शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न होता है।

20.
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥

अर्थ: नगरकोट में आप ही विराजमान हैं और तीनों लोकों में आपकी महिमा का डंका बजता है।

21.
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥

अर्थ: आपने शुंभ-निशुंभ जैसे दानवों का संहार किया और अनेक रक्तबीजों का वध किया।

22.
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

अर्थ: महिषासुर बहुत अभिमानी राजा था, जिसके पापों के भार से पृथ्वी व्याकुल हो गई थी।

23.
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

अर्थ: आपने कालिका का भयंकर रूप धारण करके महिषासुर का उसकी पूरी सेना सहित संहार किया।

24.
परी गाढ़ सन्तन पर जब-जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अर्थ: जब-जब संतों पर कोई विपत्ति आई है, तब-तब हे माता, आपने उनकी सहायता की है।

25.
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

अर्थ: आपकी महिमा के कारण अमरपुरी और अन्य लोकों में रहने वाले सभी लोग शोक से दूर रहते हैं।

26.
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

अर्थ: ज्वालामुखी में आपकी ज्योति सदैव विद्यमान रहती है और नर-नारी आपकी सदा पूजा करते हैं।

27.
प्रेम भक्ति से जो यश गावै।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

अर्थ: जो भी प्रेम और भक्ति से आपकी यशगाथा गाता है, उसके पास कभी दुख और दरिद्रता नहीं आती।

28.
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

अर्थ: जो व्यक्ति एकाग्र मन से आपका ध्यान करता है, वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

29.
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

अर्थ: योगी, देवता और मुनि कहते हैं कि आपकी शक्ति के बिना योग संभव नहीं है।

30.
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

अर्थ: शंकराचार्य ने कठोर तप किया और काम तथा क्रोध पर विजय प्राप्त की।

31.
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

अर्थ: वे दिन-रात भगवान शंकर का ध्यान करते रहे, लेकिन किसी समय आपका स्मरण नहीं किया।

32.
शक्ति रूप को मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

अर्थ: वे शक्ति स्वरूप की महिमा को समझ नहीं पाए। जब उनकी शक्ति चली गई, तब उन्हें इसका पछतावा हुआ।

33.
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

अर्थ: तब वे आपकी शरण में आए और आपकी कीर्ति का गान किया। हे जगदम्बा भवानी, आपकी सदा जय हो।

34.
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

अर्थ: आदि जगदम्बा माता प्रसन्न हुईं और बिना विलंब किए उन्हें शक्ति प्रदान कर दी।

35.
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

अर्थ: हे माता! मैं बहुत कष्टों से घिरा हुआ हूँ। आपके अलावा मेरे दुखों को कौन दूर कर सकता है?

36.
आशा तृष्णा निपट सतावे।
मोह मदादिक सब विनशावै॥

अर्थ: आशा और तृष्णा मुझे बहुत सताती हैं। मोह और अहंकार आदि ने मुझे परेशान किया हुआ है।

37.
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

अर्थ: हे महारानी माता! मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए। मैं एकाग्र होकर आपका स्मरण करता हूँ।

38.
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥

अर्थ: हे दयालु माता, मुझ पर अपनी कृपा कीजिए और ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करके मुझे निहाल कीजिए।

39.
जब लगि जियउं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥

अर्थ: जब तक मैं जीवित रहूँ, आपकी दया का फल पाता रहूँ और सदैव आपकी यशगाथा गाता रहूँ।

40.
दुर्गा चालीसा जो नित गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

अर्थ: जो व्यक्ति नित्य दुर्गा चालीसा का गायन करता है, वह सभी सुख प्राप्त करके परम पद को प्राप्त करता है।

41.
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्बा भवानी॥

अर्थ: देवीदास स्वयं को आपकी शरण में आया हुआ मानकर प्रार्थना करता है। हे जगदम्बा भवानी, उस पर अपनी कृपा करें।

In this article, we have shared the complete Maa Durga Chalisa Hindi lyrics for daily chanting and prayer.

Chanting Maa Durga Chalisa with devotion brings peace, positivity, strength, and the divine blessings of Maa Durga.

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