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Last updated |August 18, 2026

Maa Durga Ki Aarti In Hindi | मां दुर्गा की आरती

Aarti | Maa Durga | Maa Durga Aarti
Maa Durga Ki Aarti In Hindi

मां दुर्गा को शक्ति, साहस और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। नवरात्रि, शुक्रवार या किसी भी शुभ अवसर पर भक्त मां दुर्गा की पूजा के बाद उनकी आरती करते हैं। दुर्गा माता की आरती करने से मन को शांति मिलती है और भक्त मां का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

अगर आप Maa Durga Ki Aarti In Hindi, आरती के सही पाठ और पूजा के आसान तरीके की जानकारी खोज रहे हैं, तो यहां आपको एक ही जगह पर जरूरी जानकारी मिल जाएगी।

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Maa Durga Ki Aarti In Hindi | मां दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौर

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी

जय माता दी

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दुर्गा माता की आरती का महत्व

मां दुर्गा की आरती केवल पूजा की एक रस्म नहीं है, बल्कि यह भक्त और मां के बीच श्रद्धा और भक्ति का भाव व्यक्त करने का एक सुंदर तरीका है। आरती के दौरान दीपक जलाकर मां के सामने प्रार्थना की जाती है और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।

कई लोग Maa Durga Ki Aarti रोज सुबह या शाम करते हैं, जबकि नवरात्रि के दौरान इसका विशेष महत्व माना जाता है। आरती के समय परिवार के सभी सदस्य एक साथ शामिल हों तो पूजा का माहौल और भी भक्तिमय हो जाता है।

दुर्गा माता की आरती कब करनी चाहिए?

Maa Durga Ki Aarti सुबह या शाम पूजा के बाद की जा सकती है। नवरात्रि में विशेष रूप से सुबह पूजा और शाम की आरती करने की परंपरा कई घरों में देखने को मिलती है।

हालांकि आरती के लिए कोई एक समय जरूरी नहीं है। सबसे जरूरी बात है कि आरती श्रद्धा और साफ मन से की जाए।

दुर्गा माता की आरती के लिए क्या चाहिए?

आरती के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। आप अपनी सुविधा के अनुसार इन चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • घी या तेल का दीपक
  • कपूर
  • अगरबत्ती
  • फूल
  • रोली और अक्षत
  • जल
  • आरती की थाली
  • मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर

अगर आपके पास सभी सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो भी श्रद्धा से मां का ध्यान करके आरती की जा सकती है।

दुर्गा माता की आरती कैसे करें ?

सबसे पहले मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं और पूजा की जगह को साफ रखें। मां को फूल अर्पित करें और कुछ देर शांत होकर उनका ध्यान करें।

इसके बाद Maa Durga Ki Aarti शुरू करें। आरती की थाली को मां की प्रतिमा के सामने धीरे-धीरे गोल घुमाएं। आरती पूरी होने के बाद मां से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।

अंत में सभी लोग आरती लें और प्रसाद ग्रहण करें।

दुर्गा माता की आरती करने से क्या लाभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा की आरती करने से मन में सकारात्मकता आती है और भक्त को मानसिक शांति का अनुभव होता है। मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा भक्तों में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने की भावना से भी जुड़ी है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूजा और आरती का सबसे बड़ा उद्देश्य श्रद्धा, विश्वास और मन की शांति है।

नवरात्रि में दुर्गा माता की आरती

नवरात्रि मां दुर्गा की भक्ति और पूजा के लिए विशेष पर्व है। इन नौ दिनों में भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। सुबह पूजा करने के बाद और शाम को दीपक जलाकर दुर्गा माता की आरती करना कई परिवारों की परंपरा है।

नवरात्रि के दौरान घर में आरती करने से भक्तिमय वातावरण बनता है और परिवार के लोग मिलकर मां का स्मरण करते हैं।

Conclusion

मां दुर्गा शक्ति और भक्ति का प्रतीक हैं। उनकी आरती करते समय मन को शांत रखकर मां का ध्यान करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि आपको यहां Maa Durga Ki Aarti का पाठ और पूजा से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से मिल गई होगी।

जय माता दी। 🌺

दुर्गा माता की आरती – FAQ

दुर्गा माता की आरती कौन सी है?
दुर्गा माता की सबसे लोकप्रिय आरतियों में “जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी” आरती शामिल है। इसे नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।
दुर्गा माता की आरती कब करनी चाहिए?
दुर्गा माता की आरती सुबह या शाम पूजा के बाद की जा सकती है। नवरात्रि के दिनों में शाम की आरती करने की विशेष परंपरा कई घरों में है।
क्या दुर्गा माता की आरती रोज कर सकते हैं?
हां, भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार रोज दुर्गा माता की पूजा और आरती कर सकते हैं। इसके लिए नवरात्रि का इंतजार करना जरूरी नहीं है।
दुर्गा माता की आरती के लिए क्या-क्या चाहिए?
आरती के लिए दीपक, कपूर, फूल और आरती की थाली जैसी सामान्य पूजा सामग्री पर्याप्त है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा और भक्ति मानी जाती है।
क्या नवरात्रि में दुर्गा माता की आरती करना जरूरी है?
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा और आरती करने की परंपरा है, लेकिन इसे किसी मजबूरी की तरह नहीं बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए।
दुर्गा माता की आरती करने से क्या लाभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा की आरती करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मकता का अनुभव होता है। भक्त मां से सुख, शांति और शक्ति की प्रार्थना करते हैं।
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